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BS4 अभियान पर दो शब्द …

साथीयों, हम सभी को पता है कि बामसेफ संगठन पीछले पचास सालों से सामाजिक आंदोलन के कारवां को निरंतर छला रही है। इस कारवां को आगे आगे ले जाने की प्रक्रिया में वह हमेशा संविधानिक मुद्दोंको उठाते आयी है। मूलनिवासी बहुजन समाज की भिन्न भिन्न समस्याओं के विषयों पर अपना संविधानिक पक्ष रखकर लोगों को संगठित करना उसका निरंतरता का कार्य रहा है।

BS4 अभियान की जमीन

मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 9 अगस्त 2018 को दिल्ली के संसद मार्ग पर संविधान की प्रति जलाने की घटना हुई थी। यह (घटना) विरोध प्रदर्शन SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम में किए गए संशोधनों के विरोध में आयोजित किया गया था। इस घटना को ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी फाउंडेशन (आजाद सेना)’ और ‘आरक्षण विरोधी पार्टी’ नामक संगठनों के सदस्यों ने अंजाम दिया था। जैसे ही यह घटना घटी देश भर में जनता तथा क‌ई संगठनो ने विरोध प्रदर्शन किया। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बैन लगाने की मांग फिर से जोर शोर से उठी। इस घटना पर बामसेफ परिवार के तमाम संगठनों ने संविधान के पक्ष में देश भर आंदोलन किया।
भारत के संविधान के पक्ष में उठे इस आंदोलन का विष्लेषण करने के बाद पता चला कि संविधान के पक्ष में ज्यादातर आंदोलन सिर्फ शहरों में ही हुए है। गांव देहात की जनता ने इस पर कोई खास ध्यान नही दिया। इस बात का पता चलते ही बामसेफ की केन्द्रीय कार्यकारिणी इस पस गहरा चिंतन किया और गांव-गांव तक भारत के संविधान की जानकारी पहुंचाने के लिए ‘भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा तथा संवर्धन’ (BS4) इस टायटल के तहत जनजागरण अभियान शुरू किया।

दायरा तथा गतिविधियां :

बामसेफ ने अपनी पुरी ताकत लगाकर तथा अन्य लोकतांत्रिक तथा संविधानवादी संगठनों को साथ में लेकर संपूर्ण देश में, गांव-गांव में इस अभियान को चलाने लक्ष हाथ में लिया। इस जनजागरण अभियान में गांव की जनता को जोड़ने का लक्ष रखा। हर गांव में चयनित नागरिकों के माध्यम से PSA (पीपल्स सोशल ऐक्शन) कमेटीयों का गठन कर उन्हें भारत के संविधान के पक्ष में गांव में जागृति करने तथा समयानुसार संविधानीक अधिकारों के पक्ष में आंदोलन करने का उद्देश्य भी दिया गया।
इस अभियान के तहत ओबीसी, एस सी, एस टी तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों ने दिल खोल कर स्वागत किया तथा इसका हिस्सा बनने लगे। गांव गांव में बैठकों का दौर शुरू हुआ। संविधान जागृति यात्रा, संविधान गीत, लोकगीत, संगीत, नुक्कड़ नाटक, नाटिका, पुस्तिकाएं, स्टिकर, पोस्टर, होल्डिंग, रैली, सभा सम्मेलनों के माध्यम से BS4 अभियान ने वर्ष 2024 आते आते पुरे देश को अपने प्रभाव में ले लिया। फेसबुक, व्हाट्स एप, इंस्टाग्राम तथा यु ट्युब के बहुजन चैनलों पर भी इसने जगह बना ली। खास कर MNT News Network ने पहली प्राथमिकता पर लिया और इस अभियान की हर छोटी-बड़ी खबर को कवर किया तथा संविधानवादी विश्लेषकों को आमंत्रित कर चर्चाएं चला‌ई।
बामसेफ ने जिलास्तरीय ‘क्लस्टर कन्व्हेंशन’ का आयोजन कर देश के कोने-कोने के संविधान प्रेमियों, प्रचारकों को जिलें के आयोजनों में आमंत्रित कर उन्हें इस आंदोलन का हिस्सा बनाया। इस अभियान के माध्यम से नव ‘संविधान प्रबोधकों ‘ को तयार किया तथा उनके लिए जिला, राज्य स्तर के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी किया। जिससे इस जनजागरण को और अधिक बल मिला।
भारत के संविधान के इस जनजागरण से मिली जानकारी से लोग धिरे धिरे लाभान्वित होने लगे। परिणाम स्वरूप देश भर में जगह जगह भारत के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए अनेकों संगठनों के माध्यम से आंदोलन चलने लगे। हालांकि यह जनजागरण अभियान भारत के संविधान की प्राथमिक जानकारी लोगों को देने के उद्देश्य से ही शुरू हुआ था, परंतु इसका परिणाम भी देखने वाला था।

देश की राजनीति पर प्रभाव:

वर्ष 2019 के आम चुनाव के आते आते इस जनजागरण अभियान का महत्व क‌ई राजनीतिक दलों को भी समझ आने लगा। जिसका फायदा सबसे पहले कॉन्ग्रेस ने उठाया। राहुल गांधी ने इस प्लान के जैसा ही हु-ब-हू दुसरा प्लान बनाया और हाथ में संविधान की पुस्तक लेकर प्रचार किया। (याद रहे कि कॉन्ग्रेस ने ही LPG की निति ला कर भारत के संविधान पर पहला कुठाराघात किया है।) लेकिन देर हो गई थी। 2019 के लोकसभा का चुनाव भाजपा पुर्ण रुप से जित गई। क्योंकि संविधान जागृति का यह अभियान बामसेफ ने सामाजिक आंदोलन तथा जनजागृति के तहत हाथ में लिया था, लिहाजा बामसेफ इसे निरंतर चलाती रही। भारत के संविधान की इस जनजागृति के परिणाम 2024 की लोकसभा चुनाव में देखने को मिले। ‘चार सौ पार’ के भाजपा के सपने को इसने तोड़ दिया और ‘हिन्दू राष्ट्र’ के सपने को भी। देश की संसद में बाबासाहेब आंबेडकर तथा संविधान की जय-जयकार का नारा भी जोरों से लगा। बाद में भाजपा ने भी ‘घर-घर संविधान’ का फर्जि नारा लगाया।

इस बार का स्वरूप:

  बामसेफ ने 'भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा तथा संवर्धन' (BS4) के इस अभियान को निरंतर चला रही है। 2026 के इस वर्ष से 'राष्ट्रीयकरण से लोकतांत्रिक राज्य समाजवाद की ओर' इस टायटल के तहत संपुर्ण राष्ट्रीयकरण के पैग़ाम को वह जनता तक पहुंचाना चाहती है। इसके संबंधीत सभी सुचना देश भर में पहुंचा दी गई है। गत 30, 31 तथा 1 जनवरी को इससे संबंधित राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण शिविर नागपुर में संपन्न हुआ। जिसमें देश भर के सभी 'संविधान प्रबोधक' प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। फ़रवरी में  सभी राज्यों में 'संविधान प्रबोधकों' का प्रशिक्षण होगा। यह संविधान प्रबोधक गांवों में पहुंच कर 'राष्ट्रीयकरण' के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएंगे।

BS4 अभियान का उद्देश्य:

१) जनता मे भारत के संविधान की समझ बनाना।
२) जनता को उनके मुलभूत अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
३) जनता को उसके मूलभूत कर्तव्यों को समझना।
४) जन प्रतिनिधि तथा सरकार के कर्तव्य को समझना।
५) प्रशासनिक कामकाज को समझना।
६) अर्थव्यवस्था को समझाना।
७) वोट के अधिकार को समझना।
८) लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को समझना तथा उनके प्रति आदर जगाना।
९) आपसी भाईचारा बनाकर सौहार्दपुर्ण जीवन की सिख देना।
इस जनजागरण अभियान को सफल बनाने के लिए बामसेफ संगठन ने देश के तमाम SC,ST,OBC तथा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के नागरिकों से इस जनजागरण अभियान के साथ जुड़ने तथा तन-मन-धन से साथ सहयोग करने की अपील की है।

दुष्यंत एस. पाटील
बामसेफ पुर्णकालिक कार्यकर्ता,
औरंगाबाद, महाराष्ट्र।