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बामसेफ द्वारा देश में चलेगा राष्ट्रीयकरण से राज्य समाजवाद का अभियान।

बामसेफ का 42 वां राष्ट्रीय अधिवेशन फिलौर, जालंधर, पंजाब में दिनांक 6 से 9 दिसम्बर तक सफलतापूर्वक संपन्न…

बामसेफ द्वारा वर्ष 2018 के गया (बिहार)के राष्ट्रीय अधिवेशन से भारतीय संविधान सम्मान सुरक्षा संवर्धन राष्ट्रव्यापी महाजनजागरण अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसके पश्चात देश के सभी राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लपक लिया था, और संविधान और लोकतंत्र का मुद्दा देशभर में छा गया, बामसेफ ने अभी 6,7,8,9 दिसंबर को फिल्लौर पंजाब में बामसेफ का 42 वां राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया है।

इस अधिवेशन में बामसेफ ने अनेक सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की,देश विदेश से अनेक शिक्षाविदों व समाज शास्त्रियों व शोधकर्ताओं तथा बामसेफ के प्रतिनिधियों ने चर्चा सत्रों में भाग लिया और अपने बहुमूल्य विचार सांझा किए, इस अधिवेशन में फुले अम्बेडकरी संगठनों, आंदोलन व विचारधारा से संबंधित अनेक प्रतिनिधियों ने अधिवेशन स्थल पर मूलनिवासी बहुजन संगठनों की समन्वय एवं सहयोग समिति के अंतर्गत बैठक में सहभागी हुए और इस समिति को संघ का रुप दिया।

अधिवेशन में आम जनगणना के साथ साथ जाति आधारित जनगणना भी हो और यह निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से हो, जनगणना में ओबीसी,एस,एसटी का पूरा और सही डेटा आना चाहिए, इसमें कोई भी गड़बड़ी ना हो,इस बात का ध्यान रखा जाए क्योंकि पिछली जनगणना में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आंकड़े में हेराफेरी की गई थी, यह गड़बड़ी इस प्रकार से हुई थी जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों से संबंध रखने वाले व्यक्ति दूसरे राज्यों में रह रहे थे उनकी जनगणना सामान्य वर्ग में ही की गई थी, जिसके कारण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की वास्तविक संख्या नहीं आ पाई थी और इसके अनुपात में उन्हें समुचित भागेदारी भी नहीं मिल पाई थी, अन्य पिछड़े वर्गों का तो और भी बूरा हाल था ,क्योंकि ओबीसी का सही डेटा अभी तक नहीं मिल पाया है, इसलिए ओबीसी को उसकी संख्या के अनुपात में समुचित प्रतिनिधित्व देने के लिए ओबीसी की जनगणना का आंकड़ा आना बेहद जरूरी है। ओबीसी 1931 की जनगणना के अनुसार देशभर में 52 प्रतिशत था,अब इसमें और भी अधिक बढ़ोतरी हुई होगी।

ओबीसी की जनगणना के अनुपात में सभी क्षेत्रों में उचित प्रतिनिधित्व हो, उसके अनुरूप योजनाएं बने। न्यायपालिका से कोलेजियम सिस्टम खत्म हो और भर्तियां भारतीय न्यायिक सेवा के माध्यम से हो तथा अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को भी इसमें संख्या के अनुपात में भागेदारी मिले, उचित प्रतिनिधित्व के बिना कोलेजियम सिस्टम बेईमानपूर्ण है। इसमें सुधार की अति आवश्यकता है।

किसानों की फसलों पर एम एस पी लागू हो,खाद, बिजली, पानी और कृषि उपकरणों पर किसानों को छुट मिले, किसानों के लिए बने आयोगों की रिपोर्ट लागू हों और राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, दीनबंधु सर छोटूराम व बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के विचारों पर आधारित देश में कृषि नीति बने आदि विषयों पर गंभीरता से चिंतन किया गया। यह अधिवेशन आने वाले समय सामाजिक न्याय का अध्याय बनेगा।

देश भारत के संविधान से चलना चाहिए न कि मनुस्मृति से, केंद्र सरकार की श्रम शक्ति नीति 2025 की आलोचना की गई है और चेतावनी दी गई कि मौजूदा सरकार के कर्ता-धर्ता श्रम शक्ति नीति के माध्यम से इसमें मनुस्मृति को घुसेड़ रहे हैं, इससे सरकार में बैठे लोगों की मंशा जाहिर होती है कि वे वास्तव में करना क्या चाहते हैं, ऐसा करना देश के मजदूरों के साथ खिलवाड़ है और इसके खिलाफ देशभर में मजदूरों को जागरूक करने का अभियान बामसेफ जारी रखेगी। इस अधिवेशन में इन सभी विषयों पर जोर दिया गया।

देश में संसदीय लोकतंत्र के लिए जरूरी है, “मजबूत विपक्ष और स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष चुनाव” लेकिन आम जनता का आज चुनावों से विश्वास उठता जा रहा है और देश की जनता को आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता नहीं लग रही है, निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो रहा है,चुनाव आयोग के क्रियाकलापों से लग रहा है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल का पिछलग्गू बना हुआ है, चुनाव आयोग की यह भूमिका ठीक नहीं है, चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए और किसी भी सत्ताधारी पार्टी का पिछलग्गू नहीं बनना चाहिए, बल्कि उसे अपने संवैधानिक दायित्व को ठीक से निभाना चाहिए।

आज मौजूदा सत्ताधारी पार्टी के लोग आए दिन लोगों की अभिव्यक्ति का गला घोंटते नजर आते हैं, पहले कांग्रेस भी ऐसा ही करती थी,अब भाजपा ने तो कांग्रेस को भी पछाड़ दिया है, भाजपा देश में मजबूत विपक्ष को देखना ही नहीं चाहती है, मजबूत विपक्ष तो छोड़िए कमजोर विपक्ष भी नहीं देखना चाहती है और जो भी भाजपा के खिलाफ है,वह सत्ताधारी पार्टी को देशद्रोही नजर आने लगता है, एक सच्चे लोकतंत्र के लिए यह बिल्कुल भी उचित नहीं है, लोकतंत्र में विपक्ष की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और आम जनता की आवाज को सुना जाना चाहिए लेकिन अब यह देश से खत्म होता जा रहा है, यह खत्म इसलिए हो रहा है क्योंकि दोनों समय में सत्ताधारी लोग एक ही वर्ग के लोग हैं। बहुजनों को इस षडयंत्र को समझकर आपसी सहयोग समन्वय स्थापित करना चाहिए। सहयोग समन्वय की दिशा में बामसेफ अन्य संवैधानिक संगठनों से मैत्री सम्बन्ध स्थापित करेंगी।

देश भर में युवा आज बेरोजगारी से दुखी और त्रस्त है,अनेक युवा अपनी जमीन जायदाद बेचकर देश छोड़कर विदेशों की ओर भाग रहे हैं,नई भर्तियां नहीं हो रही है, बड़े पैमाने पर निजीकरण बढ़ रहा है, इस निजीकरण पर लगाम लगनी चाहिए,खाली पड़े पद लालफीताशाही को बढ़ावा दे रहे हैं। लोगों को संवैधानिक नैतिकता और संवैधानिक आचरण तथा संवैधानिक अधिकार, संवैधानिक दायित्व के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता है, इसके प्रति देश की सरकारों ने ईमानदारी से कार्य नहीं किया है, आज देश की सरकारों के साथ-साथ देश की जनता को भी इस संबंध में सोचने की आवश्यकता है और इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने की भी जरूरत है। समय रहते हम सभी को संवैधानिक नैतिकता, संवैधानिक जिम्मेदारी, संवैधानिक आचरण, संवैधानिक व्यवस्था, संवैधानिक दायित्व की ओर बढ़ना होगा अन्यथा हम विकास की गति में बहुत अधिक पिछड़ जाएंगे।

बामसेफ की सभी राज्य इकाइयों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं और इन सब मुद्दों पर आज समीक्षा बैठक बुलाई है और आपसी सहयोग समन्वय बढ़ाते हुए आगे बढ़ने की रणनीति पर विचार करने का निर्णय लिया गया है, राष्ट्रीयकरण से राज्य समाजवाद के अभियान को देशभर में मजबूत किया जाएगा। इस संबंध में सभी संविधान सम्मत संगठनों का सहयोग अपेक्षित है। बामसेफ आज 21 दिसंबर और 28 दिसंबर को देश भर में बैठके आयोजित कर देश की जनता को संवैधानिक नैतिकता का पाठ पढ़ाएगा और बी एस-4 अभियान को और अधिक गति देगा । आप सभी बामसेफ के साथियों से सहयोग समन्वय स्थापित कर इस आंदोलन को मजबूत करें।


मिशन में आपका साथी
सुरेश द्रविड़
21-12-2025

( संविधान प्रबोधक एवं संयोजक मूलनिवासी बहुजन संगठनों की समन्वय एवं सहयोग समिति, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बामसेफ )

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