एससी, एसटी, ओबीसी सभी एक समान है इसलिए इनसे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यक मुस्लिम और क्रिश्चियन को भी एक समान सुविधा मिलनी चाहिए – न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा ( झारखंड उच्च न्यायालय, रांची )
फिल्लौर, पंजाब 6 दिसम्बर 2025 को बामसेफ का 42वां राष्ट्रीय अधिवेशन, दानामंडी फिल्लौर, पंजाब में प्रारंभ हुआ । यह अधिवेशन 6 से 9 दिसम्बर 2025 तक सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । सर्वप्रथम बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू. इंजि.आर एल ध्रुव, राष्ट्रीय महासचिव मू आर एस राम, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मू– सुरेश द्रविड़, मू– सुनीता कप्परवाल, मू– संजय इंगोले सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मू– नितिन थाबलके आदि ने फिल्लौर शहर, पंजाब स्थित बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और संकल्प लिया कि हम फूले–अंबेडकर सहित मूलनिवासी बहुजन महामानवों की विचारधारा को समाज में स्थापित करने का काम करेंगे ।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू इंजि आर एल ध्रुव ने किया जबकि संचालन राष्ट्रीय महासचिव मू आर एस राम ने किया । उद्घाटक के रूप में झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश मू रत्नाकर भेंगरा उपस्थित थे । जबकि विशेष अतिथि के रूप में मू– देवराज सुमन, अध्यक्ष डॉ अम्बेडकर मेमोरियल कमिटि ग्रेट ब्रिटेन, इंग्लैंड और मू– डॉक्टर के– एस– चैहान, वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायलय, नई दिल्ली उपस्थित थे । बामसेफ के राष्ट्रीय महासचिव मू– आर– एस– राम ने प्रस्तावना भाषण देते हुए कहा कि बामसेफ की स्थापना 6 दिसंबर को की गई क्योंकि 6 दिसंबर को ही बाबा साहब का परिनिर्वाण हुआ था, इसलिए बाबा साहब के मिशन को पूरा करने के लिए 6 दिसंबर को ही बामसेफ स्थापित हुआ । जब से बामसेफ बना है तब से सामाजिक क्रांति का आंदोलन अनवरत चला रहा है । डॉ– के– एस– चैहान ने कहा कि हमें एससी, एसटी, ओबीसी को जाति तोड़ो और समाज जोड़ो के तहत जोड़ने का काम करना चाहिए और मूलनिवासी पहचान के रूप में संगठित होकर राजनीतिक सत्ता हासिल कर मूलनिवासियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए । उद्घाटक न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा ने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी सभी ऐतिहासिक रूप से एक समान है इसलिए इनसे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यक मुस्लिम और क्रिश्चियन को भी एक समान सुविधा मिलनी चाहिए । विशिष्ट अतिथि मू– देवराज सुमन ने कहा कि विचार परिवर्तन ही हर तरह के परिवर्तन का मूल है । विचार परिवर्तन से ही सामाजिक परिवर्तन, राजनीतिक परिवर्तन और सांस्कृतिक परिवर्तन होता है और बामसेफ संगठन विचार परिवर्तन का महान काम कर रहा है । अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मू– इंजि– आर– एल– ध्रुव ने कहा कि बामसेफ के मिशन को हमें गांव–गांव ले जाना है और उसमें आने वाली चुनौतियों का समाधान करना है । हम जितना काम कर रहे हैं विरोधी हमारे बारे में दुष्प्रचार कर रहे हैं । हमने लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत मूलनिवासी पहचान को देश में स्थापित किया है । आज हमारे संगठन के अलावा दूसरे समविचारी लोग भी अपने को मूलनिवासी बोलने लगे हैं । बामसेफ संगठन ने जाति आधारित जनगणना का मुद्दा देश में उठाया आज हमारे विरोधी भी इसके पक्ष में बोल रहे हंै । इसी तरह से बामसेफ संविधान को लागू करने का ठै4 अभियान चला रहा है । हम चाहते हैं कि उच्च न्यायपालिका में कॉलेजियम सिस्टम खत्म होना चाहिए और इंडियन ज्यूडिशल सिस्टम के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति होनी चाहिए और उसमें ओबीसी, एससी, एसटी को समुचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए ।

इसके बाद प्रबोधन सत्र 1 जिसका विषय था– ‘‘मूलनिवासी सभ्यता–‘‘कीलाड़ी’’ और ‘‘इंडस’’ के सीधे संबंध का ताजा उद््घोष% भयभीत ब्राह्मणवाद की बोलती बंद ।’’ विषय पर बतौर वक्ता बोलते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मू– डॉ– एस– के– चहल ने कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी इस देश के मूलनिवासी हैं, यह सर्वप्रथम ज्योतिबा फुले ने कहा था और इसका प्रमाण मोहनजोदड़ो, हड़प्पा सभ्यता में है, जो पहले से विद्यमान थी लेकिन इसका सबसे बड़ा प्रमाण राखीगढ़ी की सभ्यता है । क्योंकि राखीगढ़ी में जो जीन मिला है वह द्रविड़ियन जीन है और यही प्रमाण कीलाड़ी की सभ्यता ने भी दिया है । विषय की प्रस्तावना मू– कविता मड़ावी, केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य, बामसेफ ने की जबकि इस विषय पर डॉक्टर सुखप्रीत उद्योके ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन कारणों से हमारी सत्ता गई, उन्हीं कारण को जानकर सत्ता फिर से प्राप्त की जा सकती है । मूलनिवासी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू– एडो पंकज कुमार रवि ने भी विषय पर अपनी बात रखी । इस विषय अध्यक्षता डॉ– नीलिमा बागडे़, केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य बामसेफ ने की ।
शाम को चाय अवकाश के बाद प्रतिनिधि समूह चर्चा का आयोजन किया गया जिसका विषय था ष्व्प्ै विचार–मंथन% संगठन का विस्तान और बाधओं निवारण ।’’ इस विषय का संचालन मू– मनोज कुमार, राष्ट्रीय संगठन सचिव बामसेफ ने की तथा प्रस्तावना मू– अनिल कुमा उज्जैनवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बामसेफ ने की । विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधिगणों ने समूह की चर्चा की ।
दूसरे दिन 07/12/2025 को विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने समूह चर्चा सार प्रस्तुत किया । इस सत्र की अध्यक्षता मू– एन गंगाधर केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य बामसेफ ने की । इसके बाद विशेष प्रबोधन सत्र 2 जिसका विषय था ‘‘हे मूलनिवासी बहुजनों! ब्राह्मणवादी गुटों में मत जाओ!! अपना लोकतांत्रिक विकल्प स्वयं बनाओ!!!’’ –पंजाब से बाबासाहेब का मार्गदर्शन । विषय पर प्रस्तावना मू– सुनील कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, मूलनिवासी सभ्यता संघ ने की । विषय का संचलान आलोक कुमार, सीईसी सदस्य, बासमेफ ने की । वक्ता के तौर पर मू– कृष्ण कुमार जानू, प्रदेश महासचिव जाट महासभा राजस्थान, मू– अधिवक्ता अशोक बसोत्रा, उच्च न्यायालय जम्मू एंड कश्मीर, मू– प्रोफेसर रमाकांत ठाकुर हिंदू कालेज मुरादाबाद ने विषय पर मार्गदर्शन दिया तथा इस विषय की अध्यक्षता मू– प्रो– संजय इंगोले, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बामसेफ ने की ।
इसके बाद विशेष प्रबोधन सत्र 3 जिसका विषय था ‘‘पंजाब में सामाजिक क्रांति का कारवां% पुरखों की विरासत और वर्तमान की पंूजी पर गहन चिंतन ।’’ मू– नितिन थाबलके, केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य और प्रभारी बामसेफ पंजाब ने विषय की प्रस्तावना की । मू– जसकरण सिंह, मू– डॉ– ज्योति कल्याणी, सामाजिक चिंतक अमृतसर, मू– डॉ– अमृत कौर सामाजिक कार्यकर्ता जालंधर ने बतौर वक्ता संबोधन किया तथा मंच का संचालन डॉ– कर्मबीर टंडन केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य बामसेफ ने की । इस विषय की अध्यक्षता करते हुए बामसेफ के राष्ट्रीय महासचिव मू– आर–एस– राम ने कहा कि पंजाब सामाजिक क्रांति की भूमि रही है और यहां पर सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन हमारे पुरखों ने चलाया है, बामसेफ उनसे प्रेरणा लेता है । जिस प्रकार ज्योतिबा फुले ने महाराष्ट्र में सामाजिक क्रांति का बिगुल फूंका और घोषित किया कि शुद्र और अतिशुद्र इस देश के मूलनिवासी है । वैसे पंजाब में बाबू मंगूराम मगोवालिया ने आदि धर्म का आंदोलन चलाया । पंजाब के ही मू– संतराम बी ए प्रजापति ने भी जात–पात तोड़क मंडल में बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर जी का साथ देकर सामाजिक आंदोलन और सामाजिक परिवर्तन की धारा को मजबूत किया । वहीं दीनबंधु सर छोटूराम ने किसानों का आंदोलन चलाया और बाबा साहब डा– अम्बेडकर के साथ मिलकर साइमन कमीशन का समर्थन किया था और शुद्र–अतिशुद्रों की दासता से मुक्ति के लिए आंदोलन चलाया था ।
शाम को प्रतिनिधियों के सत्र शुरू हुआ जिसका विषय था, ‘‘च्ै । का खाका% राष्ट्रीयकरण का एजेन्डा और कार्यकर्ताओं की भूमिका ।’’ इस सत्र का संचालन और प्रस्तावना मू– मनोज कुमार राष्ट्रीय संगठन सचिव ने एवं अध्यक्षता मू– संजय मोहिते, राष्ट्रीय संगठन सचिव, बामसेफ ने की ।
अधिवेशन के तीसरे दिन 8 दिसंबर को विशेष चर्चा सत्र 4 रखा गया जिसका विषय था ‘‘कैसे हो फुले अम्बेडकरी संगठनों का संगम ? आर्थात मूलनिवासी बहुजन की विचारधारा और लोकतांत्रिक चरित्र का आग्रह ही फुले–अम्बेडकरी एकता का सूत्र ।’’ सत्र का संचालन मू– ए–के– दिवाकर सीईसी सदस्य, बामसेफ ने एंव प्रस्तावना मू– पुष्पराज दहीवले, राष्ट्रीय अध्यक्ष, मककम ने की । वक्ता के तौर पर मू– अरूण गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, अर्जक संघ, बिहार, जावेद पाशा कुरैशी, अध्यक्ष, भारतीय मुस्लिम परिषद, नितिन सावंत, मानव मुक्ति मिशन, महाराष्ट्र ने संबोधन किया । विषय की अध्यक्षता मू– सुनीता कपरवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बामसेफ ने की ।
जागृति सत्र 5 के विषय ‘‘ऐतिहासिक किसान आंदोलन की उपलब्धियां और भविष्य की चुनौतियों । पर किसान संगठनों और आंदोलन से जुड़े अनेक किसान नेताओं ने इस विषय पर चर्चा में भाग लिया । विषय की प्रस्तावना मू– प्रेमपाल गौतम राष्ट्रीय कार्यालय सचिव बामसेफ ने की । पंजाब के किसान नेता मू– बलबीर सिंह राजोवाल, मू– प्रोफेसर सुभाष सैनी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र, मू– शिफत खान नेता मेवाती किसान मोर्चा, मू– डॉ विनोद आर्या, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय भंटिडा, मू– सुरेश कौथ, किसान मजदूर नेता हरियाणा ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया । इस सत्र की अध्यक्षता बामसेफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश द्रविड़ ने की ।

शाम को कलाचारिक जागृृति जलसा% ज्ञान–विज्ञान और मूलनिवासी पहचान के अन्तर्गत पंजाब के लोक नृृत्य और गद््का का प्रस्तुतिकरण हुआ जिसको दर्शकों ने खूब सराहा । इस सत्र का संचालन मू– सुनील मूलनिवासी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मूलनिवासी सभ्यता संघ ने किया, प्रस्तावना मू– डा– हरेराम सिंह कुशवाहा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बामसेफ ने की, इस विषय की अध्यक्षता मू– इंजी– सीताराम, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बामसेफ ने की ।
चैथे दिन विशेष प्रबोधन सत्र 7 का विषय, ‘‘ब्राह्मणवादी पार्टियों के चक्कर में गुम न हो जाए ओबीसी जनगणना और बजट – जमीनी हकीकत का इशारा ।’’ रहा । विषय का संचालन मू– सुरिन्द्र सिंह, केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य बामसेफ ने किया तथा प्रस्ताविक कथन मू– शर्मिष्ठा गौतम, राष्ट्रीय संगठन सचिव बामसेफ ने की । इस विषय पर मू– डॉ– मंजीत सिंह पटेल, अध्यक्ष, ओल्ड पेंशन स्कीम रिस्टोरेशन, मू– डॉ– अरविन्द कुमार सहायक प्राध्यापक, जेएमआई, नई दिल्ली, मू– अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर, उच्च न्यायालय, जबलपुर म–प्र– ने अपने–अपने विचार रखे । इस विषय की अध्यक्षता मू– आर–एल– धु्रव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बामसेफ ने की ।
वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी जनगणना की मांग इसलिए उठाई जा रही है क्योंकि इससे सामाजिक न्याय, नीति–निर्माण और संसाधनों के सही वितरण में मदद मिलेगी । इससे आबादी का सही आंकड़ा मिलेगा, भारत में 1931 के बाद कभी भी जाति आधारित विस्तृत जनगणना नहीं हुई है । ओबीसी की कुल जनसंख्या को लेकर केवल एक अनुमान हैं और इस अनुमान के अनुसार ओबीसी 52 प्रतिशत से अधिक है, परन्तु यह सटीक डेटा नहीं है । बिना ठोस डेटा के सरकार प्रभावी नीतियां नहीं बना रही है, ओबीसी की जनगणना से आरक्षण नीति को एक मजबूत आधार मिलेगा । ओबीसी को मिलने वाला 27% आरक्षण वास्तविक जनसंख्या के अनुपात में मिलने लगेगा, इससे वास्तविक स्थिति का आभाष होगा । अगर जनसंख्या अधिक है, तो इसके अनुपात में एक बड़े वर्ग की भागेदारी सुनिश्चित हो सकेगी । जाति जनगणना और ओबीसी जनगणना से सामाजिक–आर्थिक पिछड़ेपन का वास्तविक मूल्यांकन हमें देखने को मिलेगा । सिर्फ जाति ही नहीं ओबीसी वर्ग की शिक्षा, रोजगार, गरीबी, भूमि–स्वामित्व, स्वास्थ्य आदि की स्थिति पता चलेगी । इससे यह भी पता चलेगा कि कौन–सी जातियां पीछे हैं और कौन सी जातियां आगे बढ़ चुकी हैं । नीतियों को सही लक्ष्य समूह तक पहुंचाने में आसानी होगी । ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए भी यह जरूरी है, संसद, विधानसभा, नौकरियों और प्रशासन में ओबीसी का प्रतिनिधित्व वास्तविक जनसंख्या के हिसाब से है ही नहीं । यह डेटा से हमें पता चल पाएगा और अनेक अनावश्यक बहसों को विराम मिलेगा । राजनीतिक दल और सरकार पर सही प्रकार से सामाजिक न्याय को लागू कर पाएगी । आर्थिक सर्वेक्षण और विकास योजनाओं की सटीकता बनेगी । सरकार आज अनुमान आधारित योजनाएं ही चलाती है, वास्तविक संख्या मिलने पर बजट का सही आवंटन हो पाएगा । क्षेत्र अनुसार योजनाएं बनाने में भी आसानी होगी, शिक्षा–स्वास्थ्य–रोजगार आधारित योजनाएं और अधिक प्रभावी बन पाएगी । यह सामाजिक न्याय के बहुत ही जरूरी है । बाबा साहेब डॉ– अंबेडकर ने हमेशा कहा था कि डेटा के बिना न्याय संभव नहीं । सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आरक्षण, सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए सटीक सामाजिक–आर्थिक और जातिगत डेटा जरूरी हैं ।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने कहा कि ओबीसी जनगणना इसलिए जरूरी मांग है क्योंकि इससे सटीक आबादी का पता चलेगा, ओबीसी के आरक्षण को आरक्षण का वैज्ञानिक आधार मिल पाएगा । पिछड़ी जातियों की वास्तविक यथास्थिति सामने आ जाएगी । नीतियों का सही लाभ सही लोगों तक पहुंच पाएगा । सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व मजबूत होगा, केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता दिखानी चाहिए ।
अंतिम सत्र समापन सत्र रखा गया जिसकी अध्यक्षता बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी– आर– एल– धु्रव ने की, और संचालन बामसेफ के राष्ट्रीय महासचिव इंजीनियर आर– एस– राम ने किया । बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर एल ध्रुव ने बामसेफ के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बामसेफ कार्यकर्ताओं की मेहनत और लगन ने बामसेफ के 42वें राष्ट्रीय अधिवेशन को यादगार बना दिया है । यह सफलता आपके दूरदर्शी नेतृत्व का जीता–जागता प्रमाण है, पूरी टीम ने जिस समर्पण से काम किया, वह प्रशंसनीय है । बामसेफ की केंद्रीय कार्यकारिणी और बामसेफ पंजाब इकाई के लिए बधाई की पात्र है । इस आयोजन की भव्यता और व्यवस्था देखकर सभी कार्यकर्ता और सहयोगी प्रभावित हुए हैं, आपने जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे न केवल प्राप्त किया, बल्कि उससे भी आगे बढ़ गए हैं ।
यह उपलब्धि आपके अथक प्रयासों का फल है, सभी कार्यकर्ता और सहयोगियों को बहुत–बहुत मुबारक व हार्दिक मंगलकामनाएं । आपकी यह सफलता सभी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और नये कीर्तिमान स्थापित करेंगी ।
बामसेफ राष्ट्रीय अधिवेशन की मीडिया कमेटी के चेयरमैन व बामसेफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश द्रविड़ ने फिल्लौर के सभी मीडिया के साथियों का आभार प्रकट किया । अंत में बामसेफ पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष डॉ– अर्जून देव ने सभी का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन किया ।
इस अवसर पर बामसेफ की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य मू– नितिन थाबलके, सुरेश द्रविड़, मू– रमा शंकर राम, मू– डॉ– संजय इंगोले, मू– मधुकर मेश्राम, मू– कविता मडावी, मू– सुनीता कपरवाल, मू– हरे राम सिंह कुशवाहा के साथ–साथ अन्य गणमान्य लोग मू– हेमराज सिंह पटेल, मू– रामलाल, मू– एस एस धम्मी, मू– सरदार सुरेंद्र सिंह, मू– बिहारी लाल गिंडा, मू– जोगेंद्र सिंह, मू– सोढ़ी राम झल्ली, मू– अशोक खेड़ा, मू– संधीर कुमार, मू– दिलिप कुमार, मू– डॉ कर्मबीर टंडन, मू– दयाराम, मू– कुलविंदर लाल, मू– ज्ञान सिंह, मू– बोधराज खटाना, मू– शिवराज सिंह फिल्लौर, मू– मेहरचन्द, मू– गुरमीत सिंह, मू– जॉन नाथेवाल, मू– एडो– अंकुश गिल, मू– डा– ब्रजेश बंगर, मू– डा– गुरपाल सिंह, मू– हंसराज समरा, मू– मनोज कुमार, मू– बलविन्द्र कौर, मू– जेपीआर अमेरिका, मू– एडो– चरणजीत सिंह पौवारी, मू– गगनदीप सिंह आदि भी उपस्थित थे ।
