नागपुर: वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों में मूल निवासी बहुजन समाज के सक्षम सामाजिक शैक्षिक आर्थिक सांस्कृतिक एवं संवैधानिक चुनौतियां निरंतर बढ़ती जा रही है ऐसे समय में विभिन्न मूल निवासी बहुजन संगठन सामाजिक संस्थाओं एवं वैचारिक मंचों के बीच आपसी सहयोग एवं समन्वय तथा एकता स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। इसी उद्देश्य से दिनांक 13 एवं 14 जून को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले सामाजिक क्रांति संस्थान, नागपुर में देशभर के बहुजन संगठनों की राष्ट्रीय सहयोग एवं समन्वय समिति द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन बैठक संपन्न हुई। इसके अलावा आमंत्रित प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया था।
इस राष्ट्रीय समन्वय समिति के राष्ट्रीय महासचिव महादेव कामले ने उपस्थित सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। बैठक का उद्घाटन तन-मन धन अर्पण हो … इस मूलनिवासी राष्ट्रगान से की गई।
जयहिंद सिंह जी ने इस चिंतन बैठक का स्वागत भाषण किया। इसके अलावा जिस डी.के. खापर्डे मोबाइल मेमोरियल ट्रस्ट परिसर में इस चिंतन शिविर का आयोजन किया गया था उस ट्रस्ट के उद्देश्यों तथा चल रहे हैं कार्य किलापों की विस्तृत जानकारी उपस्थित प्रतिनिधियों के बीच रखी।
परिचय सत्र के बाद महासचिव महादेव कांबले ने प्रस्तावना में इस राष्ट्रीय समन्वय समिति के निर्माण का इतिहास बताया तथा आजतक किए गए कार्य का ब्योरा रख दो दिन के बैठक का संचालन किया।
इस चिंतन बैठक का उद्घाटकिय भाषण डी.के. खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष बी.डी. बोरकर ने किया। अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया की बहुजन समाज में बहुत से संगठन कम कर रहे। उन सभी के साथ जनता जुड़ी हुई है इसका मतलब यह है कि उन संगठनों की समझ में जरूरत है। लेकिन अकेले-अकेले काम करने से हमारे महापुरुषों के आंदोलन का उद्देश्य हम हासिल नहीं कर सकते इसलिए हमें एक साथ आकर एक साझा कार्यक्रम बनाकर उद्देश को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। सभी संगठनों को एक साथ आकर सत्ता प्राप्ति की दिशा में तथा संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रण में लेकर व्यवस्था परिवर्तन के कार्य को करना चाहिए।

सुरेश द्रविड़: नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी का मूलनिवासी बहुजन ऑर्गेनाइजेशंस (NCCMBO) के राष्ट्रीय समन्वयक सुरेश द्रविड़ ने अपनी प्रस्तावना में बताया की इस राष्ट्रीय समन्वय समिति की पहली बैठक 2023 में नागपुर में संपन्न हुई थी इसमें 90 संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। उसे समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अध्यक्षता में जिन मुद्दों पर सहमति बनी वे यह थे कि हम किसी के विरोध में नहीं जाएंगे जिन मुद्दों पर संगठनों में आपसी सहमति नहीं बनती उन्हें छोड़कर जिन पर सहमति बनती है उन पर हम कार्य करने के लिए आगे बढ़ेंगे भारत के संविधान को लागू करने की दिशा में हम काम करेंगे जो संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं उन्हें साथ लेकर हम काम करेंगे, हम हमेशा मिलकर रहेंगे और एक साथ काम करते रहेंगे हम जहां पर भी काम करेंगे हमारे साथ किसान युवा महिला विद्यार्थी आदि के साथ मिलकर आंदोलन का कार्य करेंगे। इसके अलावा मूलनिवासी पहचान पर भी कार्य करने का संकल्प लिया गया था।
अपनी प्रस्तावना में उन्होंने आगे बताया कि इतिहास में हमसे गलतियां हुई है परंतु हमने गलतियों को भूल कर एक साथ कार्य करने की जरूरत है मार्च 2026 में दिल्ली की जो पुन्ह: बैठक हुई थी, उसमें मुझे अध्यक्ष बनाया गया और महादेव कांबले जी को महासचिव बनाया गया है। यह पद केवल नाम के लिए है; असल में हम सभी समान है। उस बैठक में एक रिसर्च कमेटी भी बनाई गई है, जो संगठनों को जोड़ने और प्रबोधन का अभ्यासक्रम बनाने के लिए कार्य करेगी। मैं आशा करता हूं कि इस दो दिवसीय चिंतन बैठक में आप पूरी तन्मयता से सहभागी होंगे।
डॉ. के.एस.चौहान: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अभियान अधिवक्ता डॉ स चौहान ने इस चिंतन बैठक तथा प्रशिक्षण शिविर में भारतीय संविधान और संविधान वाद इस विषय पर अपनी बात रखते हुए भारत का सामाजिक सिस्टम भारत के संविधान तथा संविधान वाद का कैसे दुरुपयोग कर रहा है इसे अनेक उदाहरण देकर विस्तार से समझाया।
एस.आर.मौर्या: बामसेफ संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता एस. आर. मौर्य ने लोकतांत्रिक पद्धति और संस्थागत नेतृत्व इस विषय पर बात रखते हुए फॉर्मल संगठन तथा इनफॉर्मल संगठन, लोकतांत्रिक संगठन की आवश्यकता, संगठन में गुण दोष का निवारण, सुप्रीमो नेता से नुकसान, लोकतांत्रिक संगठन में पारिवारिक तत्वों का महत्व, संगठन में मध्यम मार्ग का अनुसरण, कल्याणकारी व्यवस्था, बड़ा दिन बड़ी सोच रखने से संगठनों के समन्वय में होने वाले लाभ आदि बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया।
अभिजीत भगत: प्रशिक्षक अभिजीत भगत ने फुले अंबेडकर विचारधारा पर प्रशिक्षण देते हुए राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने जिस प्रखरता से तथा स्पष्ट से अपना आंदोलन चलाया उससे उनकी विचारधारा का विकास हुआ तथा राष्ट्र निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने जिस दूरदृष्टिता तथा क्षमता भाव से अपना आंदोलन चलाया उस से उनकी विचारधारा का उद्भव हुआ और इन दोनों मानवों की विचारधारा भारत के संविधान में कैसे निहित है इस पर गहराई से प्रकाश डाला।
भानजी भाई राठौड़: मूलनिवासी आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता भांजी भाई राठौड़ ने मूलनिवासी पहचान पर विस्तार से अपनी बात रखी उन्होंने बताया कि राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले तथा राष्ट्र निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो हमें मूलनिवासी पहचान की थ्योरी दी है उसे साथ लेकर तथा डीएनए रिसर्च के द्वारा प्राप्त रिपोर्ट को लेकर मूलनिवासी पहचान को स्थापित करने के लिए हमें आगे बढ़ाने की जरूरत है। इससे हिंदू और मुसलमान की होने वाली हत्याओं को रोका जा सकता है और इससे फुले-आंबेडकरी आंदोलन को सफलता भी मिलेगी।
डॉ. संजय इंगोले: प्रो. डॉ. संजय इंगोले ने संघटनात्मक व्यवहार पर बात रखते हुए व्यक्तिगत जीवन तथा सांगठनिक जीवन, सांगठनिक जीवन में व्यक्ति की भूमिका तथा समूहिक भूमिका, संगठन में लोगों को जोड़ने के मानक बनाने की आवश्यकता, सार्वजनिक जीवन में सांगठनिक व्यवहार के घटक, वैचारीकी दृष्टिकोण एवं दिशा, व्यक्ति संगठन और समाज में तालमेल बिठाकर आंदोलन चलाना, मानवी जीवन पर परिणाम करने वाले घटक, मानव की मानसिक स्थिति पर परिणाम करने वाले घटक, औपचारिक संगठन में नियमों के पालन करने की बाध्यता तथा उसके परिणाम आदि पर गहराई से उपस्थित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया।
नितिन सावंत: मानव मुक्ति मिशन के प्रबोधनकार नितिन सावंत ने आंदोलनात्मक संबंध-संवाद तथा मृदु कौशल पर बहुत ही प्रभावशाली प्रशिक्षण दिया। अपनी बात की शुरुआत में ही उन्होंने तथागत बुद्ध को संवाद कौशल के दुनिया के सबसे बड़े आदर्श बताया। विनयशीलता बुद्ध का संदेश है यह संवाद कौशल में काम आता है। एक उदाहरण देकर उन्होंने समझाया कि बुद्ध के विरोधी उनके संवाद कौशल के आगे सफल हो जाते थे। इसलिए हमें पहले संवाद कौशल को सीखना होगा। हमें लोगों से निजी बातों पर बात ना कर सामाजिक विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। आगे से सवाल आए तो जरूरी नहीं की हर सवाल का जवाब इस समय दिया जाए। कुछ सवालों को आगे के लिए छोड़ देना उचित होता है। संकट काल में हमें शांति धरण करना सीखना चाहिए और जब संकट चल जाए तो फिर से कार्यों को शुरू करना चाहिए।
संवाद करते समय हमें दूसरों की आस्था और धारणाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। हमें यह तय करना होगा कि हमें लोगों को विज्ञान वादी बनाना है या गैर बराबरी के खिलाफ प्रेरित करना है ? क्योंकि अपनी अपनी आस्थाओं को मानने वाले लोग भी विषमता के खिलाफ आंदोलन में काम आ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हमारे संत है। जिन्होंने ईश्वर पर आस्था रखते हुए भी ब्राह्मणवाद के खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया। हमारे मुद्दे तथा बात करने का तरीका विधायक होना चाहिए। कॉन्शियसनेस तथा सबकॉन्शियसनेस का तर्कशास्त्र लोगों को जोड़ने का सबसे प्रभावशाली साधन है। जिसका हमें उपयोग करना चाहिए। पुराने तथा नए तौर तरीके अपना कर हमें लोगों का प्रबोधन करना होगा।

डॉ. विकास जांभुलकर: आमंत्रित प्रशिक्षक डॉ. विकास जंभुलकर ने लोकतांत्रिक राज्य समाजवाद इस विषय पर बात रखते हुए राज्य को परिभाषित किया तथा बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के ‘स्टेट एंड माइनारटीज’ इस प्रबंध को समझाते हुए लोकतांत्रिक राज्य समाजवाद की भारत के संविधान में निहित भूमिका को समझाया। इसके अलावा वर्तमान में पूंजीपतियों द्वारा व्यापारिक स्वतंत्रता के तर्क वितर्क के हवाला देते हुए वर्तमान सरकार की निजीकरण की नीतियों को समझाया। उन्होंने समझाया कि पूंजीपति तथा कॉर्पोरेट वर्ग अर्थव्यवस्था में राज्य का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए ऐसा कहता है। जिससे व्यापारियों को मुक्त रूप से व्यापार-उद्योग में काम करने के खुले अवसर होंगे। लेकिन भारत के संविधान के तहत देश में सभी संसाधनों का वितरण देश की जनता में सम्मान रूप से करने का दायित्व सरकार पर होने के कारण अर्थव्यवस्था में सरकार का अर्थात राज्य का हस्तक्षेप जरूरी है इसके बगैर सरकार जनता के साथ आर्थिक न्याय नहीं कर सकती है। डॉ. जांभुलकर ने सरकार तथा पूंजीपतियों की मिलीभगत से देश की खस्ता हुई अर्थव्यवस्था की हालत को तथा उनके षड्यंत्र को भिन्न-भिन्न उदाहरण देकर समझाया।
एच.के.बैरवा: आपने संविधानवाद बनाम धर्मतंत्र इस विषय को PPT के द्वारा प्रस्तुत कर विस्तृत जानकारी दी। जिसमें वर्ण व्यवस्था का विश्लेषण कर धर्म तंत्र के राज को परिभाषित किया तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की चर्चा करते हुए संविधान वाद के विरुद्ध धर्म तंत्र कैसे काम करता है यह समझाया। एच.के. बैरवा ने अपने प्रशिक्षण में प्रशिक्षण के प्रकार, प्रशिक्षण की परिभाषा, तुलनात्मक सैद्धांतिक प्रशिक्षण, धर्म तंत्र की सैद्धांतिक व्यवस्था, धर्म तंत्र की विशेषता, धर्म तंत्र की परिभाषा, धर्म तंत्र एक काल्पनिक व्यवस्था, ब्राह्मण सांस्कृतिक विरासत, इसके विरुद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था, लोकतंत्र की विशेषता, लोकतंत्र की परिभाषा, श्रमण सांस्कृतिक विरासत, लोकतंत्र तथा धर्म तंत्र की तुलनात्मक सैद्धांतिक समीक्षा की। साथ ही धर्म तंत्र के विरुद्ध संविधान वाद को सफल बनाने के लिए 3 पॉइंट एजेंडे का व्यावहारिक प्रशिक्षण का मॉडल समझाया।
इस चिंतन बैठक एवं प्रशिक्षण शिविर को जिस उद्देश्य से आयोजित किया गया था वह निम्नलिखित है।
१) मूलनिवासी बहुजन संगठनों के बीच संवाद एवं विश्वास का वातावरण निर्माण करना।
२) सजा सामाजिक एवं संवैधानिक मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर की कार्य योजना बनाना।
३) संघटनात्मक मतभेदों को दूर कर सहयोग की संस्कृति विकसित करना।
४) सामाजिक परिवर्तन हेतु सजा नेतृत्व की अवधारणा को मजबूत करना।
५) शिक्षा संगठन एवं जन जागरण के लिए संयुक्त अभियान की रूपरेषा तैयार करना। तथा
६) राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग एवं समन्वय समिति का गठन कर उसका विस्तार करना।
उपरोलिखित छः उद्देश्यों को हासिल करने के लिए इस चिंतन बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों द्वारा संघटनात्मक अनुभव एवं सुझाव, बहुजन संगठनों में एकता की आवश्यकता पर जोर दिया गया तथा वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों एवं बहुजन समाज की चुनौतियों पर गहराई से चिंतन किया गया। इस चिंतन बैठक में उपस्थित प्रतिनिधि ने अपने संगठनात्मक अनुभव एवं सुझाव साझा किया उनके बीच खुला संवाद एवं विचार विमर्श के सत्र भी चलाए गए। प्रशिक्षण शिविर में भिन्न-भिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति दी। बहुजन आंदोलन को सफल बनाने के लिए सहयोग समिति की स्थाई संरचना, साझा राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं अभियान की योजना बना कर राष्ट्रीय समन्वय समिति का विस्तार तथा भविष्य की कार्य योजना बनाई गई।साझा संकल्प बनाकर उसे सर्व सम्मति से पारित किया गया।* चिंतन बैठक के समापन में भविष्य की कार्य योजना के निर्देश दिए गए।
इस समय NCCMBO की शोध समिति की बैठक हुई जिसमें नए कार्यक्रमों को प्रस्तावित कर योजना बनाई गई। जिसमें सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
समापन सत्र में के अंत में सुरेश द्रविड़ तथा महादेव कांबले द्वारा बैठक में तय संकल्पों का उद्घोष किया गया तथा फिर से तन मन धन अर्पण हो… इस मूल निवासी राष्ट्रीय गीत को गाकर चिंतन बैठक का समापन किया गया।