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राष्ट्रीयकरण द्वारा राज्य लोकतांत्रिक समाजवाद पर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण संपन्न

नागपुर: दि. 30, 31जनवरी एवं 1 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ। बामसेफ द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन वरिष्ठ कार्यकर्ता मान. एच. सी. सहारे, चंद्रपुर (महाराष्ट्र) ने किया।
इस प्रशिक्षण शिविर की प्रस्तावना केन्द्रिय सदस्य मान. शत्रुजित सिंह ने की। अपनी प्रस्तावके उन्होंने कार्यक्रम का प्रारुप पढ़ा तथा प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य उपस्थित प्रतिनिधियों को समझाया।
मान. एच.सी.सहारे ने अपने उद्घाटकिय भाषण में उन्होंने कहा कि “हम बामसेफ द्वारा चलाए जा रहे एक अनोखे आंदोलन का हिस्सा है। हमें याद रखना होगा कि हमे अपने पुरखों की विरासत को ठीक से चलाना है। संविधान प्रबोधक होने के नाते हमें भारत के संविधान को ठीक से समझना होगा और अच्छी तयारी से हमें फिल्ड में जाना होगा। बहुजन समाज की आशाओं को पल्लवित करने की जिम्मेदारी हमारी है।
“हमारा समाज चुनाव के समय कुछ पैसों में अपने वोट को बेंच देता है। उसे भी हमें मार्गदर्शन करने की जरूरत है। इस शिविर में जो जानकारी आपको मिलेगी उसे आप ठीक से ग्रहण करेंगे। आप क‌ई सालों से संगठन के साथ जुड़े हैं। मैं आशा करता हूं कि इस प्रशिक्षण का पुरा लाभ उठाकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।”

इस शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि वरिष्ठ कार्यकर्ता एस.डी.तिरपुडे थे। उन्होंने कहा “इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से हम अपने साथियों में ज्ञान का विकास करना चाहते हैं। इसलिए समय-समय पर इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। ऐसा देखने में आया है कि हमारे सेवाकर्मी साथीयों का रुझान अपनी नौकरी पर ज्यादा होता है। ऐसे में वे समय न होने का बहाना बनाते हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हमें समय निकालना ही होगा। कुछ साथी कहते हैं कि हम अपना कार्य तो करते है पर समाज साथ नहीं आता। यह चिंतन का विषय है। भारतीय समाज में हमें लोगों के चरित्र को समझना होगा। तब ही अपनी बात समझा पाएंगे।”
“हमारी समस्या का केन्द्र राजनितिक सत्ता है। जब तक हम सत्ता प्राप्ति की दिशा में प्रशिक्षित नहीं होते, तब तक व्यवस्था परिवर्तन नहीं होगा। हमें लोगों को चिन्हित करना होगा। समाज के प्रति संवेदना नहीं बनाए रखने से हम सफल होंगे। हम दिनों-दिन आगे बढ़ रहे हैं और मुझे आशा है कि हम जल्द ही अपना लक्ष हासिल कर लेंगे।”

शिविर के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय संगठन सचिव मान. संजय मोहिते ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ” इन तिन दिनों में जो चर्चा हम यहां करनेवाले हैं उसे धरातल पर ले जाना है। यहां पर उपस्थित प्रतिनिधियों में भविष्य के विधायक और सांसद है। हमने जो व्यवस्था बनाई है, उससे हम निश्चित ही शासक बनेंगे।
“बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें संविधान की नैतिकता सिखाई है। वर्तमान के नेताओं और नौकरशाहों ने संविधानिक नैतिकता को दफन कर दिया है। इसलिए हमें ही जनता को संविधान की नैतिकता का पाठ पढ़ाना होगा।”
“हम पर लोग आरोप लगाते हैं कि हम जनता को नागरिक शास्त्र पढ़ा रहे हैं। लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि हमने और सरकारने ‘नागरिक शास्त्र’ को गंभीरता से लिया होता तो आज देश में इतने खराब हालात नहीं होते। आज देश नागरिक कम और हिन्दू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, ईसाई और जाति की पहचान से जीनेवाले लोग ही नजर आ रहे हैं। हमने जातिवाद और ब्राह्मणवाद पर प्रहार किया, मूलनिवासी पहचान को प्रचारित कर ब्राम्हणवाद को अलग-थलग कर दिया है। यह हमारी जीत है।”
संजय मोहिते ने आगे कहा कि इस शिविर में हम सिमांत किसान और मजदूरों की समस्याओं पर चिंतन करेंगे और सामान्य लोगों की ताकत जो भारत के संविधान में है यह बात हम जनता को समझाएंगे।

तिन दिन चले इस प्रशिक्षण शिविर में बी.डी.बोरकर, प्रो. संजय इंगोले, सुरेश द्रविड़, शर्मिष्ठा गौतम, शत्रुजित सिंह आदि ने अपना प्रशिक्षण दिया। इस बीच प्रशिक्षणार्थियों द्वारा संवाद के लिए ‘फिडबैक’ सत्र और खुली चर्चा का सत्र भी चलाया गया।

समापन सत्र में बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर.एल.ध्रुव ने मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा “हम अपने कार्यकर्ताओं को ‘संविधान प्रबोधक ‘ कह रहें है। किन्तु हम ‘टिचर’ नहीं है, तो हम ‘प्रिचर’ की भूमिका में हैं। क्योंकि टिंचर को कुछ ही छात्रों को पढ़ाना होता है। लेकिन हमें असिमित लोगों को प्रशिक्षित करना है। उन्हें भारत के संविधान के मूल्यों को समझना है। इस मायने में हम ‘प्रिचर’ है। इसलिए हम अपने लोगों की उस क्षमता को विकसित करना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा “हमारा काम ‘सोशल प्रोग्रेस’ करना नहीं है तो ‘सोशल चेंज’ है। लेकिन हमारे काम को मिटानेवाली शक्तियां भी समाज में काम कर रही है। इसलिए हमें जल्दी से अपने कार्य को अंजाम देना होगा। उसके लिए हमें ‘क्विक रिस्पांस’ वाली प्रक्रिया में जाना होगा। क्योंकि लंबे समय में आनेवाला बदलाव ‘क्रांति’ नहीं कहलाता।”
“हमे एक कार्य एक साथ करने बजाय क‌ई कार्य एक साथ करने होंगे। मैं जानता हूं कि हमने जो मकसद चूना है, वह आसान नहीं है। क्योंकि आसान काम तो सामान्य लोग करते हैं। हमारा मकसद ही हमें असामान्य बनाता है। इसलिए हम अपनी सारी ‘मशिनरी’ को इस कार्य में लगा रहे हैं। इसकी सफलता के लिए हम पर्याप्त आर्थिक संसाधनों का भी प्रबंध करेंगे। इस कार्य को करते हुए हमारे सामने क‌ई बाधाएं आएंगी। लेकिन अगर हमने अपनी ‘रोल एन्ड रिस्पांसबिलिटी’ के दायरे को समझकर काम किया तो हम आधी समस्याओं से निजात पा लेंगे।”
आगामी कार्यक्रम पर चर्चा करते हुए ध्रुव ने बताया कि बामसेफ के माध्यम से जल्दी ही देश की आधी आबादी के लिए देश भर में झोलन वाइज शिविरों का आयोजन कर रहे हैं। विद्यार्थी हमारे भविष्य के आंदोलन का स्तोत्र है। उसके लिए भी हम व्यापक कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं। अभी हमारे आंदोलन का केंद्र मानव संसाधन है। उसे ध्यान में रखकर हम जल्दी ही 2029 की ‘हाय व्होल्टेज’ योजना सामने लानेवाले है। हमारे आंदोलन की सारी जानकारी दुनिया भर उपलब्ध कराने के लिए और लोगों को भारी तादाद में आंदोलन से जोड़ने के लिए बामसेफ संघठन का ‘प्ले स्टोर’ पर ऐप लॉन्च करने वाले हैं।
अंत में में उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपिल की कि अपनी बात को जनता तक पहुंचाने के लिए जनता की ही बोली तथा उनकी समास्याओं को जोड़कर आसान बनाकर पहुंचाएं।

इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन केन्द्रीय प्रशिक्षण समिति के द्वारा किया गया। जिसमें प्रमुखता से एम.डी.चंदनशिवे (मुख्य ट्रेनिंग डायरेक्टर), प्रदिप बनसोडे (ड्यूपीटी ट्रेनिंग डायरेक्टर) तथा डॉ. दिपा श्रावस्ती (सह ट्रेनिंग डायरेक्टर) भुमिका निभाई।

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